हेक राजा खोद्‍द नूं मोल्ख चा सारा मूं समझदार राजा समझता। ओ डेखणा चहावे ला की ओच्‍ची सोच सही छे या गल्त, कां ये मोल्ख मां कुई ओ कन्‍नू समझदार छे या कोन्हीं। हा सोचती कन्‍न ओण्हे आपणे सारे नूं भेल्‍ले करले ता वा कन्‍नू पूछले की माये मन मां का छे ! सारे मनतरिया ने आपणा-आपणा दिमाक ला दिमाग़ पर्र वाचे मूं कुई जिणा वी ओच्‍चे सवाल चा सही जबाब नी डे सगला। ओ बेल्हे राजे ने आपणे सेनापति नूं कहले की हेके मेहने चे अन्दर-अन्दर मोल्ख चे सारा मूं समझदार बन्दे नूं सोहती आ जक्‍को माये मन ची बात बावड़ती डियो। सेनापति ने सारी जगा सोहले पर्र कुई तरक्‍की नी मिड़ली ता सेनापति निरास हुत्‍ती गेल्‍ला। मगर ओच्‍ची छ्‍वेरी ने ओन्हूं कहले की में ऊं बन्दे सोहती डी। सेनापति ने कहले ठीक छे।

हेक डियो वे छ्‍वेरी ने अकल चे खतम गुवाल नूं पकड़ती कन्‍न आपणे ब़ा चे सामणे भुकाणले जत्‍ती। ओ गुवाल वाचा नोकर हुत्‍ता। छ्‍वेरी ने आपणे ब़ा नूं कहले, तू एन्हूं राजे कन्‍नू गहली जा। सेनापति अचमभित्त हुत्‍ती गेल्‍ला। पर्र छ्‍वेरी ने ओन्हूं कहले की हा गुवाल राजे ची सारी पिरोसानिया चा हल काढ़ती नाखी। सेनापति ने कुई चारा ना डेखती कन्‍न गुवाल नूं महल मां गेहली चाहला आल्‍ला। राजा महल मां सेनापति ची बाट डेखे ब़ेहलता ला। सेनापति ने गुवाल नूं राजे चे सामणे आणले। गुवाल ने आंखिया ऊपर करती कन्‍न राजे डुस डेखले।

राजे ने आपणी हेक आंगली ऊपर चल्ली। एचे जबाब मां गुवाल ने आपणिया डोन आंगलिया ऊपर चलिया। एचे बाद राजे ने आपणिया तीन आंगलिया ऊपर करलिया। हा डेखती कन्‍न गुवाल ने आपणी गिच्‍ची हिलाली ता उट्‍ठू नासणे ची सोचली। राजा जोरा-जोरा चे हंसला ता इसड़े समझदार बन्दे आणने कल्‍ले सेनापति नूं साबस डिल्‍ली ता ओन्हूं एनाम डिल्‍ला। सेनापति सोचता रहती गेल्‍ला ता ओच्‍चे पल्‍ले कस्‍सा नी पड़ले। ओण्हे राजे नूं एचा राज बावड़ने कल्‍ले कहले।    

राजा ब़ोडला,“ हेक आंगली चत्‍ती कन्‍न में ओ कन्‍नू पूछले का में सारा मूं समझदार छे। ओण्हे डोन आंगलिया चत्‍ती कन्‍न मन्‍नू याद कराले की नरीकार वी छे जक्‍को जादा कोन्हीं ता माये बराबर समझदार छे। बलति में ओ कन्‍नू पूछले की का कुई तीजे वी छे। पर्र ओण्हे गिच्‍ची हिलाती कन्‍न बिल्कोल्‍ल साफ मना करती डिल्‍ले। हा जुवान बडा गियानी छे। में सोचता की में हेको जिणा ही समझदार छे। एण्हे मन्‍नू नरीकार चे बारे मां बावड़ले ता तीजे नूं कोन्हीं मनले।”

सारे जिणे आपणे-आपणे घरे चाहले गेल्‍ले। राती चे सेनापति ने गुवाल कन्‍नू पूछले की राजे चे इसारा चा का मतलब निकड़ला ता तू वाचा जबाब किंवे डिल्‍ला। गुवाल ब़ोडला,“ मालिक मां कन्‍नू तीन भेडा छी। जिसे बेल्हे तू मन्‍नू राजे चे सामणे गेहती गेल्‍ला ता ओण्हे मन्‍नू हेक आंगली डिखाणली। में समझला की ओ मायी हेक भेड गेहणा चहावे। में सोचले की ओ इतना बडा राजा छे! ए सांगू में ओन्हूं डोन भेडा डेणा चहावे ला ता डोन आंगलिया चलिया जत्‍ती पर्र एचे बाद ओण्हे तीन आंगलिया डिखाणलिया। में समझले की ओ माया तीन्हीं भेडा गेहणा चहावे ए सांगू में ओन्हूं गिच्‍ची हिलाती कन्‍न मना करती कन्‍न उट्‍ठु नासणा चहावे ला।” सेनापति गुवाल ची बात सुणती कन्‍न हंसला ता ब़ोडला,“ तू डर्र ना ता कन्‍नू दुद्‍धिया भेडा कुई वी नी गिही।
 

पंचांग

वरणमाला केदा

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