हा किस्‍सा हेक घणी सोहणी अस्तरी चां छे, विच्‍चे ना परमादेवी हुत्‍ते। वा हेके इस्कूल मां मेडम हुत्‍ती। ओ बेल्हे सारे देस मां छुवाछूत ची बिमारी फेड़ली आल्‍ली हुत्‍ती। परमादेवी इस्कूल मां पढ़ाऊं जत्‍ती मगर इस्कूल मां आल्‍ले ब़ाला नूं हाथ ना लाती। ब़ाला नूं कहती की तम्हीं मां कन्‍नू हेक फोट्‍ट दूर रहले करा। वा वाचिया किताबा नूं वी हाथ ना लाती। इस्कूल चे अलावा विच्‍चे घर मां वी इसड़े कड़े नेम बणले आल्‍ले हुत्‍ते। साफ-सुथरे रहणा विन्‍नू घणे आच्छे लागते ता वा आपणे गद्‍दड़ा नूं सुंगड़ले आल्‍ले ना डेखती। छोटे-छोटे ब़ाला नूं वी पियार करती पर वान्हूं आपणी गोडी मां ना ब़िसाणती ता ना आपणे गद्‍दड़ा पे ब़ेस्‍सू डित्‍ती।

सम्‍मे बितती गेल्‍ला परमादेवी सत्तर साला ची हुत्‍ती गेल्‍ली। विच्‍चे लारे विच्‍ची छ्‍वेर रहती। परमादेवी नूं हेक घणी गन्दी बिमारी हुत्‍ती गेल्‍ली ना ता वा टोर्र सगती ता ना काये सहारे चे बेन्‍न आपणा पासा पुत्तर सगती ता विच्‍चे सरीर घणे हलुल हुत्‍ती गेलते ले। विच्‍ची छ्‍वेर विच्‍ची सेवा-पाणी करती पर कई बार परमादेवी घणी देरी तक गन्दगी मां पल्‍ली रहती। जिसे नोकर नूं वा आपणे कन्‍नू दूर राखती। आज वा वाचे सहारे चे बेन्‍न हेक मेन्ट वी ना भिल्‍ली रह सगती। परमादेवी देल्‍ल ची बुरी कोन्हीं हुत्‍ती पर जिन्दगी मां जिसिया बाता नूं डेखती कन्‍न घणी चिड़ती ता अणजाण बणती कन्‍न काये वी देल्‍ल ना डुखाती। ब़ुढ़ापे मां विन्‍नू यां बाता लारे जीणे पड़ले।

सीख -सम्‍मे कड्‍डी वी हेक सिरका ना रिही वी, सम्‍मे लारे सब कोच्छ बदलती जाये वे मगर आपणा वेवहार इसड़ा राखो की सम्‍मे चे आंगू झुकणे ना पड़ो।
 

पंचांग

वरणमाला केदा

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