हेक महान राजा हुत्‍ता ओच्‍चे ना रामधन हुत्‍ते। लोका ची सेवा करणा ओच्‍चा धरम हुत्‍ता। ओच्‍ची जनता वी ओन्हूं राम आल्‍ली कन्‍न पुजती। राजा सारा ची बेन्‍न लालच चे सेवा करता। चाहे वा जनता ओच्‍चे देस ची हो या कुई नेरे देस ची। ओच्‍चे ये सुभा चे कारण नेरे देस चे लोक वी ओच्‍ची परसन्सा करते। नेरे देस चा राजा भीमसिंह रामधन कन्‍नू चिड़ता। ओण्हे ओन्हूं हरावणे ची सोचली ता कई डिया चे बाद रामधन चे इलाके पे हमला करती डिल्‍ला। भीमसिंह ने छल लारे ओ कन्‍नू लड़ाई जितती गेल्‍ली ता राजा रामधन नूं जंगल मां नासणे पड़ती गेल्‍ले। इतने होणे चे बाद वी लोक राजा रामधन ची परसन्सा करते। हर जगा ओचिया बाता हुतिया। ए सांगू राजा भीमसिंह नूं चेन कोन्हीं हुत्‍ता ते राजा रामधन नूं मारणे ची सोचली। ओण्हे एलान करवाला की जक्‍को राजा रामधन नूं पकड़ती कन्‍न माये सामणे आणी में ओन्हूं एनाम मां सोने डी।

राजा रामधन जंगल मां भटकता फिर्रे ला ता ओन्हूं हेक जुवान मिड़ला ता ओण्हे ओ कन्‍नू पूछले भऊ तू मन्‍नू ये इलाके चा लागी पल्‍ला। का तू मन्‍नू राजा रामधन चे इलाके चा रस्ता बावेड़ सगी? रामधन ब़ोड़ला, तन्‍नू का काम छे ओ कन्‍नू। जुवान ब़ोड़ला, माये छोरा ची तबियत खराब छे ता माया सारा पेसा ओच्‍चे एलाज मां लागती गेल्‍ला। लोका चे मूंहा मूं सुणले हुत्‍ते की राजा रामधन सारा ची मदद करे वे। हा बात सुणती कन्‍न राजा रामधन जुवान नूं गेहती कन्‍न राजा भीमसिंह कन्‍नू आल्‍ला। ओन्हूं डेखती कन्‍न सारे लोक अचमभित हुत्‍ती गेल्‍ले।

राजा रामधन ब़ोड़ला, हे राजन तू मन्‍नू सोधणे आल्‍ले नूं सोने डेणे चा एलान करला हुत्‍ता। हा जुवान मन्‍नू दुद्‍धे सामणे गेहती आल्‍ला ए सांगू तू एन्हूं एचा एनाम डे। हा बात सुणती कन्‍न भीमसिंह नूं एसास हुल्‍ला की राजा रामधन कीतना महान ता दानी छे। ओण्हे आपणी गल्ति मनली ता ओच्‍चा इलाका ओन्हूं पुट्‍ठा डिल्‍ला जत्‍ती ता ओच्‍चे डिखाणले आल्‍ले रस्ते पे चलणे चा फेंसला करला। एन्हूं कीही वी की कर भल्‍ला ता हुवी भल्‍ला।

पंचांग

वरणमाला केदा

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