हेक डियो अकबर ते बीरबल सिकार कल्‍ले गेल्‍ले। उट्‍ठे सिकार करते बेल्हे अकबर ची आंगली बढ़ीली गेल्‍ली। अकबर नूं घणा रड़ा हुवे पलता ला। इतने मां बीरबल ब़ोड़ला, “ कुई बात नी महाराज, जक्‍को हुवे आच्छे कल्‍ले हुवे।” अकबर नूं बीरबल ची बात पे घणा घुस्‍सा आल्‍ला ता ओण्हे आपणे सेनिक नूं कहले की बीरबल नूं जेली मां ढकती नाखा। सेनिक ने बीरबल नूं पकड़ती कन्‍न जेली मां ढकती नाखले ता अकबर हेकला सिकार कल्‍ले उगते चाहला गेल्‍ला। रस्ते मां आदीवासी लोका ने जाल बिछाती कन्‍न अकबर नूं पकड़ती गेल्‍ले ता ओच्‍ची बलि चढ़ावणे कल्‍ले ओन्हूं आपणे नेते सामणे गेहती आल्‍ले।

नेता जींवे अकबर ची बलि चढ़ावणे कल्‍ले उगते आल्‍ला ता ओण्हे डेखले की अकबर ची हेक आंगली बढ़िली पलती ली। ए सांगू ओच्‍ची बलि नी डिल्‍ली ता ओन्हूं छोड़ती छोड़ले। अकबर नूं आपणी गल्ति चा एसास हुल्‍ला ता फोरन बीरबल कन्‍नू पुजला। बीरबल नूं जेली मूं काढले ता ओ कन्‍नू आपणी भूल ची माफी मांगली। बीरबल बलति ब़ोडला, “जक्‍को हुवे वे आच्छे कल्‍ले हुवे वे।” अकबर ने पूछले की में तन्‍नू जेली मां ढकले एच्‍चे मां आच्छे हुल्‍ले।    बीरबल ब़ोडला, “ महाराज, अगर तू मन्‍नू ढके आ ना ता में दुद्‍धे लारे सिकार करू जाये आ ता आदीवासी लोक मायी बलि डिया जत्‍ती। बीरबल ची बात सही हुल्‍ली की जक्‍को हुवे वे ओच्‍चा आखिरी फेंसला वी आच्छा हुवे वे।

पंचांग

वरणमाला केदा

भासा जागरूकता पोस्टर