हेक डियो हेक गरीब कुणबे चे छोर नोकरी सोधणे कल्‍ले रेलगड्‍डी मां जाये पलते ले। ओच्‍चे घरे कड्‍डी-मड्‍डी भाजी चढ़ती, ए सांगू ओण्हे रस्ते मां खाणे कल्‍ले हेको रोटिया चलिया जत्‍ती। आधा पन्ध निकलणे चे बाद ओन्हूं भोक्‍ख लागती गेल्‍ली ता उ आपणे टिप्‍पणा मूं रोटिया काढ़ती कन्‍न खाऊं ब़ेसती रहले। ओच्‍चे खाणे चा तरीका कोच्छ अल्ग हुत्‍ता। उ रोटी चा हेक गिरां भांती कन्‍न आपणे टिप्‍पणा मां ओन्हूं यूं ब़ोड़े की लोका नूं लागो की उ भाजी लारे रोटी खाये ब़ेहले, बल्कि ओ कन्‍नू ता हेको रोटिया हुतिया। ओच्‍चे ये ओघणा नूं डेखती कन्‍न लारे ब़ेहली आल्‍ली बन्दी वी घणी हेरान हुत्‍ती। उ छोर हर वारी गिरां भांने ते कुड़ी-मिठक चा टिप्‍पणा मां ब़ोड़ती कन्‍न खाती छोड़े। सारी बन्दी हा सोची ब़ेहलती ली की उ छोर यूं कां करे ब़ेहले। वाचे मूं हेक जुवान कन्‍नू पूछणे चे बगेर नी रहले गेल्‍ले। ओण्हे ओ कन्‍नू पूछले, भऊ, तूं यूं कां करी ब़ेहला, दुद्‍धे कन्‍नू ता भाजी कोन्हीं बलति वी तू गिरां भांती कन्‍न टिप्‍पणा मां यूं बोड़ी ब़ेहला की जींवे ता कन्‍नू भाजी छे। उ छोर ब़ोड़ले, भऊ ए खाली ढक्‍कण मां भाजी कोन्हीं मगर में आपणे मन मां हा सोचती कन्‍न खाये ब़ेहला की ए ढक्‍कण मां घणा सारा अचार छे ता में अचार लारे रोटी खाये ब़ेहला।

ओ जुवान बलति ब़ोडला, खाली ढक्‍कण मां गिरां ब़ोड़ती कन्‍न खायी ब़ेहला, हालि वी तन्‍नू अचार चा सुवाद आवे पल्‍ला। छोर ब़ोड़ले, हवे, बिल्कोल्‍ल आवे पल्‍ला। में रोटी लारे अचार सोचती कन्‍न खाये ब़ेहला ता मन्‍नू घणे आच्छे लागे पल्‍ले। ओच्‍ची ये बाते नूं गड्‍डी मां ब़ेहले बन्दा ने सुणले ता वाचे मूं हेक जिणा ब़ोडला, भऊ, अगर तन्‍नू सोचणे ही हुत्‍ते ता अचार जगा कुई नेरी भाजी सोचे आ। जींवे मटर पनीर, साही पनीर, तन्‍नू याचा सुवाद वी लागे आ। दुद्‍धे कहणे चे अनुसार तू अचार सोचला ता तन्‍नू अचार चा सुवाद आल्‍ला। तू अगर आच्छिया चीजा चे बारे मां सोचे आ ता तन्‍नू वाचा ही सुवाद आवे आ। अगर तू सोचणे ही हुत्‍ते ता छोटे कां सोचले, बडे कां नी सोचले, तन्‍नू बडे सोचणे हुत्‍ते।

सीख – हा बात अमची जिन्दगी पे वी लागू हुवे वे, जिसड़े अम्हीं सोचू वी, उसड़े अम्हीं बणू वी। 

पंचांग

वरणमाला केदा

भासा जागरूकता पोस्टर