हेक वारी हेक खाती हुत्ता। ओ काम करले कल्ले सेहरा मां गेल्ला। हेक डियो काम करते बेल्हे ओच्ची आरी भांली गेल्ली। बेन्न आरी चे ओच्चे काम न चले ले ते घरे आवणे बडे ओखे हुत्ते ए सांगू ओ लारे चे गांवा मां गेल्ला। ओण्हे इंगे-उगे पूछले ता ओन्हूं लुहार चा पता मिड़ला। ओ लुहार कन्नू गेल्ला ते ब़ोड़ला, भऊ मायी आरी भांती गेल्ली, तू मन्नू हेक आच्छी आरी बणाती डे। लुहार ब़ोड़ला, बणाती डी पर एच्चे मां घणे सम्मे लागी। तू काल ए बेल्हे आती कन्न आपणी आरी चत्ती जाओ। खातिया नूं ता घणी जलति हुत्ती, ए सांगू ओ ब़ोड़ला, भऊ पेसे घणे गेहती गेहे पर मन्नू आरी हिम्मा बणाती डे। बात पेसा ची कोन्हीं भऊ, अगर में जल्दबाजी मां आरी बणावी ता मन्नू माये काम मां सनतुसटी नी हुवी। में आपणे तरफूं ओजार बणावे मां कुई कमी ना राखी वी।
खाती ओच्ची बात मनती गेल्ला ते नेरे डियो आती कन्न आपणी आरी चत्ती गेल्ला। आरी घणी आच्छी बणली पलती ली। खाती पहले कन्नू कई आच्छे ते बडी सोलियत लारे काम करता। खातिया ने खोस्स हुत्ती कन्न हा बात आपणे सेठा नूं बावड़ली ते लुहार ची घणी बढ़ाई करली। सेठा ने आरी नूं बडे गोरा लारे डेखले। यिच्चे कितने पेसे गेहले लुहार ने। खाती ब़ोड़ला, डस रूप्पे। सेठ मन मां सोचू लागती गेल्ला की सहर मां अगर इतनी आच्छी आरी बेचली जाओ ता कुई ची तरीस रूप्पे डेणे कल्ले मनती जायी। कां ना इसड़िया आरिया बणाती कन्न सेहरा मां बेचू। नेरे डियो सेठ लुहार कन्नू पुजला ते ब़ोड़ला, में ता कन्नू घणिया आरिया बणवावी ते हर आरी चे डस रूप्पे डी। मगर मायी हे सरत छे आज कन्नू बाद हेको तू माये कल्ले आरिया बणावे ता नेरा नूं आरिया बणाती नी बेचे।
में दुद्धी सरत ना मन सगी, लुहार ब़ोड़ला। सेठ ने सोचले की लुहार नूं घणे पेसे चाही छी। ओ ब़ोड़ला, ठीक छे, में तन्नू हर आरी चे पन्दरा रूप्पे डी हिम्मा ता मायी सरत मनती जा। लुहार ब़ोड़ला, कोन्हा हालि वी में दुद्धी सरत ना मन सगी। में आपणी मेहनती चा भा खोद्द तय करे वे। में दुद्धे कल्ले काम ना कर सगी। में ये भा मा राजी छे। एच्चे कन्नू यादा भा मन्नू नी चाही छे। बडा अजीब बन्दे छी तू घरे आल्ली लकसमी नूं ठोकर मारी पल्ला। सेठ अचम्भित हुत्ती कन्न ब़ोड़ला। लुहार ब़ोड़ला, तू मां कन्नू आरिया गेहती कन्न बड़हे गरीबा नूं दुगुने भा मां बेचे। मगर में कुई गरीब चा डोक्ख ना डेख सगी। अगर में लालच करला ता एच्चा हिसाब कई बन्दा नूं करणा पड़ी, ए सांगू दुद्धी हा सरत ना मन सगी। सेठ समझती गेल्ला की हेक सच्चे ते इमानदार बन्दे नूं मुल्ख ची कुई दोलत ना गेहे सगी। ओ आपणे नेम पे अड़ला रिहे वे। आपणे ना सोचती कन्न नेरा चे बारे मां सोचणे हेक आच्छे बन्दे चा गोण छे। लुहार चहावे हा ता घरे बेल्हे घणे पेसे कमा सगे ला पर जाणता की ओच्चा लालच नेरा कल्ले आफत बणती जाये आ। ए सांगू ओ सेठा ची लालची मां नी पड़ला।
- टिपणी डाक करा