426 मे खोद्‍द कन्‍नू कड्‍डी हारला कोन्हीं, बलति नेरा ची का ओकात जक्‍को मन्‍नू हरा सगो।


427 जक्‍को खोद्‍द नू ना बदल सगी वी, वे कस्‍सा नवें ना कर सगी वी। जार्ज बनार्ड शा


428 घुस्‍सा ते अंधारी डोन्हीं हेक्‍क-सिरके छी, चोप्‍प होणे चे बाद पत्‍ता लागे वे की कितने नुकसान हुल्‍ले।


429 काये बुरे सम्‍मे मां ओच्‍चा हाथ पकड़ा, मदत करा ते हिम्मत ब़ंधावा कांकि बुरा सम्‍मे ता थोड़े डिय्‍हा मां चाहला जायी! पर ओ दुवा तम्हांनू जिन्दगी भर डिता रिही।


430 परवा ना करा कि लोक का किही, ब़स काम इसड़े ना करा कि खोद्‍द लारे ते नरीकार लारे दीद ना मिला सगा।


431 जीवन मां सारा मूं मेंगी चीज छे तमचा निकड़ला आल्‍ला सम्‍मे, जक्‍को हेकवार निकलती जाओ ता सारे मोल्‍ख चे पेसा लारे वी ना गेहे सगू।


432 जीतणे आल्‍ले कोच्‍छ अंज ना करी वी, वे काम नूं अंज-ढंग लारे करी वी।


433 नरीकार हेक्‍को मिलावणे चे काम करे वे, नाता नू जोड़ने ते तरोड़ने चे काम बन्दे खोद्‍द करे वे।


434 बन्‍दी किही वी कि अगर हाथ चा लकीरा आद्‍धिया हो ता भाग आच्‍छे ना हुवी वी, पर अम्हीं किहूं वी ठोडा पे हाथ हो अगर आई-ब़ा चा ता लकीरा ची लोहोड़ ना हुवी वी।


435 सारे कोच्‍छ खोणे चे बाद वी अगर दुद्‍धे मां होंसला छे ता तम्हीं हा समझती गिहा तम्हीं कस्‍सा कोन्हीं खोले।


436 किहा ओन्हूं जक्‍को किहो ना कान्हूं, मांगा ओ कन्‍नू जक्‍को डियो खुसी लारे, चाहवा ओन्हूं जक्‍को मिलो भागा लारे, यारी करा ओच्‍चे लारे जक्‍को निभाव हंसी लारे।


437 अंजोसले मां कुई ना कुई मिलती जाये वे, सोधा ओन्हूं जक्‍को अंधारे मां लारे रिहो।


438 जक्‍को नेरा चे थोप़डे पे खुसी डेखणा चाहवे, ऊपरला ओच्‍चे थोपड़े ची खुसी कड्‍डी ना खोसी वी।


439 खोद्‍द चे बारे मां कड्‍डी ना कुई पीरा कन्‍नू पूछो, ना कुई फकीरा कन्‍नू पूछो, आंखिया बन्द करती आपणे मन कन्‍नू पूछो।


440 बेजती चा जबाब इतनी इज्‍जत लारे डिया कि सामणे आल्‍ला खोद्‍द सरमिन्‍दा हुत्‍ती जाओ।


441 घुस्‍सा ते नफरत जहर छी, एन्हूं पीऊं अम्हीं वी ते सोचू वी मरी कुई नेरे।


442 डोक्‍ख भुगतणे आल्‍ला उगते चालती सुखी हो सगे पर डोक्‍ख डेणे आल्‍ला कड्‍डी सुखी ना हो सगी।


443 कड्‍डी-कड्‍डी इसड़े वी हुवे वे कि अराम कल्‍ले दवा ची वी, काये ब़ोल ची लोहोड़ पड़े वे।


444 जिसे बेल्हे तमचे कल्‍ले कुई दर बन्द करती नाखे, ओन्हूं हा एसास डिवावा कि कुण्‍डा डू पासू रिहे वे।


445 जिनदगी रोज अम्हांनू हेक नवां पाठ पड़ावे वे, पर अम्हांनू समझाणे कल्‍ले थोड़ी अमची सोच बदलणे कल्‍ले।


446 बन्दा ची मदत करते रिहा कांकि कुदरत चा हेक असूल छे, जिसे खूवा कन्‍नू बन्दी पाणी पी वी ओ कड्‍डी ना सुकी वी।


447 बुरे काम करणे ना पड़ी वी हुत्‍ती जाये वे, आच्‍छे काम हुवी ना वी करणे पड़े वे।


448 भगवदगीता मां लिखले पल्‍ले जिसे बेल्हे कुई पिरोसानी पेदा हुवे वे, ओच्‍चे लारे ओच्‍चा हल वी पेदा हुवे वे।


449 जे ताणी बन्दे ची जिन्दगी मां सोक्‍ख-डोक्‍ख नी आवी ओ ताणी बन्दे नू हा एसास कींवे हुवी की जिन्दगी मां का सई ते का गलत छे।


450 जंगल चे जाखते चन्दन ची लाकड़ी नू वी ब़ालती नाखे वे, यूं ही खराब बन्दे काये वी बुरे कर सगे।

पंचांग

वरणमाला केदा

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