401 देर लागी मगर सब ठीक हुवी अम्हां नूं जक्को चाही छे ऊं मिली, मायी मन्ना डिय्हे बुरी छे जिनदगी कोन्हीं।
402 आच्छे यार, आच्छे रिसतेदार ते आच्छे बिचार यां कन्नू रिही वी ओन्हूं मोल्ख ची कुई ताकत ना हरा सगी।
403 डोक्ख जिन्दगी मां ए सांगू आवे वे ताकि अम्हीं सोक्ख चा फेदा समझ सगू।
404 अम्हीं आच्छे हुत्ते, आच्छे छिऊं ते आच्छे रिहूं--- अरे फिकर तां वे करो, जक्को ब़ोली कस्सा वी, करी कस्सा वी, डिस्सी कस्सा नेरे वी ते रिही कस्सा नेरे वी।
405 जुबान पे लागली सट जलति ठीक हुत्ती जाये वे पर जुबान कन्नू लागली सट कड्डी ना भरीजी वी।
406 मनले मोल्ख बुरा छे, सारी जगा धोंक्खा छे, पर अम्हीं ता आच्छे बणु, अम्हांनू काण्हे रोकले।
407 हेक आच्छा जीवन बणावणे कल्ले हजारो धक्के खाणे पड़ी वी।
408 सम्मे ता हेक्को बखत पे ही बदले वे, ब़स बन्दे ही छे जक्को कुई बखत बदलिती जाये वे।
409 मोल्ख मां सारा मूं कड़वी चीज बन्दे ची जुबान छे, दारू ते करेले खामाखां बदनाम छे।
410 जिनदगी मां हेक नेम जरूर राखा, यार सोक्ख मां हो ता बेन्न हकारले ना जावा अगर यार पिरोसानी मां छे ता ओच्चे हकारणे ची बाट ना डेखा।
411 आपणा पे उतना बिस्वास राखा जितना दवा पे राखा वी।
412 गलती जिनदगी चे हेक पन्ने छे पर नाते जिनदगी ची किताब छी, लोहोड़ पड़ने पे गलती चे हेक पन्ने फाड़ती नाखजा पर हेके पन्ने कल्ले पुरी किताब गार ना करजा।
413 देल्ल मां वे बसी वी जाये मन साफ हुवे वे कांकि सुई मां ओ डोरा नाख सगू जिसे मां गांठ ना हो।
414 मन मां जक्को छे साफ-साफ कहती डेणे चाही छे कांकि सच ब़ोलणे लारे फेंसले हुवी वी ते कुड़ ब़ोलणे लारे फांसले..!
415 ब़ोल ही हुवी वी बन्दे चा सीसा, थोपड़े चे का...? ओ ता उमर ते हलात लारे बदलिती जाये वे..!!
416 दरद ते खुसी डोन्हीं आच्छे गुरू छी, कांकि डोन्हीं आपणी जगा कस्सा ना कस्सा सिखावी जरूर वी। स्वामी विवेकानंद
417 ग्यान धन कन्नू आच्छा छे कांकि धन ची तम्हांनू रक्सा करणी पड़े वे ते... ग्यान तमची रक्सा करे वे...।
418 सोक्ख-डोक्ख निभावणे ते कुई फूल कन्नू सीखो, बरात हो या मय्यत लारे जरूर रिहे वे।
419 हर बार हारणे ची वजह कन्नू डुक्खी नी होणे चाही छे कांकि कड्डी-मड्डी गुच्छे ची छेकड़ी चाब़ी वी जन्दरा खोलती नाखे वे।
420 बडा चा बाता घणे गोर लारे सुणा कांकि वे जिसे बेल्हे कस्सा किही वी आपणे तजुरबे लारे किही वी।
421 जे ताणी अम्हीं हेक्के डूज्जे ची मदत करते रिहूं, ओ ताणी कुई नी ढी। बलति चाहे ओ...वेपार हो, कुणबा हो या वाड़ी हो...!!
422 खोद्द नू छोटे कां समझा वी? तम्हीं ता आच्छी कामे करणे कल्ले जमले..!! स्वेट
423 जरूरी कोन्हीं की सारे सब्बक किताबा सिखाओ, कई सब्बक जिन्दगी ते नाते सिखाती डी वी।
424 हेत्त चाहणे आल्ला पराया वी आपणा छे ते भले ना करणे आल्ला आपणा वी पराया छे।
425 पेदा हुत्ते ही ना ता कुई वाड़ी पेदा वे ते ना ही दुसमन, वे ता अमचे घमण्ड, तागत ते वेवहार लारे बणी वी।
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