ब़ोली बचावा! सन्सकरति बचावा! छ्वेर बचावा सारा नूं पड़ावा!
निरमाण सोसायटी
अन्तरास्टीय मातरभासा देवस
ची घणी घणी सुभकामना।
ओड अमची आपणी-ब़ोली छे
अम्हांनू अमची ब़ोली ते सन्सकरति पे नाज छे।
अमची ब़ोली चा मान, अमचा सारा चा मान छे।
• पड़णे, पड़ाणे, सारा नू सिखावणे
ओड ब़ोली नूं उगते बड़ावणे।।
ब़ाला चे पेदा होणे चे बाद ओच्चे थरू सीखली जाणे आल्ली पहली ब़ोली ही आपणी-ब़ोली छे, आपणी-ब़ोली चा अरथ छे आपणी आई थरू ब़ोलणी जाणी आल्ली ब़ोली, जक्को ब़ाला नूं डा आती जाये वे।
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