गरमिया चे डिय्‍हा मां हेक चेला सात डिय्हा चा छुट्‍टिया गेहती कन्‍न घरे जाये पलता ला। वा डिय्हे गांवा डुस टुरती कन्‍न जते। जते बेल्हे ओन्हूं रस्ते मां हेक खू डिसला। चेले नूं तर्रेस लागली, ए सांगू ओण्हे खूवा मूं पानी छिकती कन्‍न पीले। पाणी पीते ही ओच्‍चा गला भिती गेल्‍ला कांकी खूवा चे पानी मीट्‍ठे ते ठाडे हुत्‍ते। चेले ने सोचले कां ना खूवा चे पाणी गुरू कल्‍ले वी भरली जाये। ओण्हे आपणी पाणिया ची थेली भरली ते पाणी चत्‍ती पुट्‍ठा टुरती पल्‍ला। ओ कुटिया मां पुट्‍ठा पुजला ते रस्ते ची सारी बात आपणे गुरू नूं बावड़ली। गुरू ने पाणी पीले। ओण्हे आपणे चेले नूं कहले, पाणी ता गंगाजल आल्‍ली कन्‍न मीट्‍ठे छे। चेले नूं बडी खुसी हुल्‍ली। चेला बलति गांवा डुस टुरती पल्‍ला। कतरा जी देरी मां नेरा चेला कुटिया मां आल्‍ला, ओण्हे वी वे थेली मूं पाणी पीणे ची इच्छा जाहिर करली। गुरू ने थेली ओन्हूं डिल्‍ली जत्‍ती।

चेले ने जीवें हेक घोट पाणी पीले, ओण्हे कुल्‍ला करती पानी ब़हारू काढती नाखले। चेला ब़ोडला, गुरूजी ईं पाणी ता खारे छे ते ना ही ईं ठाडे छे। तू ता वेसे ही ओच्‍ची तरिफ करली। गुरूजी ब़ोडला, पाणी मीट्‍ठे ते ठाडे कोन्हीं पर ओन्हूं आणने आल्‍ले चे मन आच्‍छे छे। जिसे बेल्हे ओण्हे पाणी पीले ते ओन्हूं माये कल्‍ले पियार जागला। हा बात घणी आच्‍छी छे। मन्‍नू वी ईं थेली चे पाणी आच्‍छे कोन्हीं लागले हुत्‍ते पर में हा कहती कन्‍न ओच्‍चे मन नूं डोक्‍ख ना डेणा चहावे ला। हा हो सगे की जिसे बेल्हे पाणी थेली मां भरले गेल्‍ले। ओ बेल्हे मीट्‍ठे ते ठाडे हुत्‍ते पर थेली खराब होणे ची वजहें कन्‍नू पुट्‍ठे आते बेल्हे पाणी खारे हुत्‍ती गेले हो। एच्‍ची वजहें कन्‍नू आणने आल्‍ले चा पियार थोड़ी कम हुत्‍ती जाये वे।

पंचांग

वरणमाला केदा

भासा जागरूकता पोस्टर