जंगल मां हेक चलाक लोम्बड़ी रहती। विन्‍नू नेरा नूं मुरख बणावणे मां मजा आता। विच्‍ची यारी हेक सारस लारे हुत्‍ती मगर सारस घणा सीद्‍धा-सादा ते सच्‍चा हुत्‍ता। हेक डियो लोम्ब़डी ने सोचले कां ना सारस लारे हंसी-मजाक करला जाये। हा सोचती कन्‍न लोम्बड़ी सारस कन्‍नू गेल्‍ली ता विणे ओन्हूं आपणे घरे खातरदारी कल्‍ले हकारले। सारस ब़ोड़ला, मन्‍नू आपणे घरे भोजन कल्‍ले हकारणे कल्‍ले दुद्‍धा, धनवाद। नेरे डियो सारस भोजन खाणे कल्‍ले सारस घरे पुजती गेल्‍ला। जिसे बेल्हे सम्‍मे हुल्‍ला, लोम्बड़ी ची पहले ही योजना बणली पलती ली। लोम्बड़ी ने ओन्हूं पलेटी मां सूप डिल्‍ला। लोम्बड़ी नूं सूप पीने मां कुई पिरोसानी कोन्हीं हुत्‍ती मगर सारस नूं आपणी चुंचे लारे पलेटी मूं सूप पीणे मां बडी पिरोसानी हुल्ली। सारस भुक्‍खा ही रहती गेल्‍ला। ओण्हे आपणे आप नूं बडे अपमानित मसूस करले। सारस समझती गेल्‍ला, यिणे माया मजाक उडारणे कल्‍ले मन्‍नू भोजन कल्‍ले हकारले हुत्‍ते।

लोम्बड़ी ने सारस कन्‍नू पूछले, तन्‍नू भोजन आच्‍छा लागला या कोन्हीं। सारस ब़ोड़ला, ठीक छे, कड्‍डी तू वी माये घरे भोजन करणे कल्‍ले आ। सारस ने आपणे मन मां सोचले की में आपणे अपमान चा बदला जरूर गिही।
नेरे डियो लोम्बड़ी सारस घरे भोजन करणे कल्‍ले पुजती गेल्‍ली। लोम्बड़ी ने सोचले आज ता खूब दब़ाती कन्‍न खायी। सारस ने वी भोजन मां सूप बणाला। सारस ने लोम्ब़डी नूं सूप सुराही मां डिल्‍ला। सारस ने आपणी बडी चुंचे लारे सुराही मूं सूप पिती गेल्‍ला। लोम्ब़डी ने चुधारू घुमती कन्‍न डेखले की सूप किवें पीये। लोम्बड़ी सूप नी पी सगली। लोम्बड़ी नूं भुखे रहणे प़डती गेल्‍ले। सारस ने आपणे अपमान चा बदला गेहती गेल्‍ला।

पंचांग

वरणमाला केदा

भासा जागरूकता पोस्टर